प्राणियों, वनस्पतियों व पारिस्थितिकी तंत्र के अधिकारों की रक्षा हेतु सार्वभौम घोषणा-पत्र
“ईश्वर के नाम पर आह्वान”

 
 
कार्रवाई के लिए एक कॉल

हमारी भावी पीढ़ियों व इस पृथ्वी के सभी निवासियों तथा प्राणियों के व्यापक हित में मनुष्य को प्रकृति के संरक्षक व अभिभावक के रूप में उसके कतेर्व्य का गौरव बोध कराने हेतु हाल के दशकों में विभिन्न लोगों ; विशेषकर युवाओं, गैर सरकारी संगठनों व सरकारों के द्वारा सराहनीय प्रयास किये गये हैं और उनके इन्हीं प्रयासों को ध्यान में रखते हुए एक सार्वभौमिक घोषणा-पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता अनुभव की गई है जिससे कि :

  • हम प्राणियों के प्रति करुणा, प्रेम, दया व मानवोचित व्यवहार को सुनिश्चित कर सकें।
  • विभिन्न जीवित प्रजातियों को विलुप्त होने से बचा सकें।
  • पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित कर सकें तथा
  • पर्यावरणीय क्षरण को रोक सकें व जलवायु परिवर्तन को रोकने में सहयोग कर सकें।
  • इस सिद्धांत की प्रतिष्ठापना की जा सके कि प्रकृति व अन्य सम्वेदनशील प्राणियों की प्रत्येक प्रजाति को मनुष्यों, उनकी मशीनों, या उनकी कृत्रिम-बुद्धिमत्ता द्वारा आहत नहीं किया जा सकता तथा उन्हें उनके जीने के नैसर्गिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। (जैसा की 4 अप्रैल 1988 को बिलक्लर्क, प्रोफेसर डेविड फेवर और स्टेनली जाॅनसन के द्वारा ‘वन्य जीव संरक्षण संधि’ के समिति के प्रस्ताव के रूप में न केवल प्रस्तावित है बल्कि पारिस्थितिकीय परिवर्तन व उसके द्वारा प्राप्त अनुभवों के रूप में व्यवहारित भी है।)
  • यह सार्वभौमिक घोषणा-पत्र राष्ट्र की सरकारों और सम्बद्ध विधिक अधिकारियों को महासागरों, सागरों, नदियों, झीलों, ग्लेशियरों, हिमखंडों, द्वीपों, राष्ट्रीय-उद्यानों, मरुस्थलों, मैदानों, वनों, पुराने वृक्षों, पहाड़ियों, पर्वत श्रृंखलाओं, चोटियों या इसी तरह के अन्य पारिस्थितिकी तंत्रों एवं उनके घटकों आदि को मानवीय हस्तक्षेप या शोषण से संरक्षित घोषित करने की सुविधा प्रदान करता है। (जैसा कि सन् 2017 में न्यूजीलैण्ड की सरकार ने वांगुंई नदी के साथ और उसके पूर्व ते-उरेवेरा पर्वतीय प्रदेश के साथ किया है और जैसा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गंगा और यमुना आदि नदियों के साथ किया है)
  • यदि किसी देश के द्वारा इस घोषणा-पत्र को स्वेच्छा से अपनाया जाता है तो उन्हें विभिन्न प्रजातियों व पारिस्थितिकी तंत्रों का संरक्षण सुनिश्चित करने वाले मौलिक, नैसर्गिक अधिकारों की रक्षा को कानूनी आधार या संबल देना होगा।
    इसके अलावा हम सभी से ये आह्वान करते हैं वे ‘वृक्ष गंगा’ योजना के अंतर्गत अपने तथा अपने परिजनों के जन्मदिवस पर अपनी पसंद का एक पौधा अवश्य लगाऐं तथा उसका जीवन भर पोषण एवं संरक्षण करें। साथ ही हम सम्बद्ध सरकारों व प्राधिकरणों का भी आह्वान करते हैं ताकि वे इसे सफल बनाने में सहयोग करें।
  • हम अधोहस्ताक्षरी यह पुष्टि करते हैं कि जीव, जगत वनस्पति व पारिस्थितिकी तंत्र के व्यापक हित में विनिर्मित ये सभी सिद्धान्त हमारी वैश्विक धार्मिक परम्पराओं के सर्वथा अनुकूल हैं और उनमें कोई भी विरोधाभास नहीं है और यह भी की जलवायु-संकट की वर्तमान स्थिति को देखते हुए तथा जीव-जगत व जीवन को विलुप्त होने से बचाने के लिए यह सार्वभौमिक घोषणा-पत्र अनिवार्य है।
सिंगापुर - 22.06.2019
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पर लॉन्च किया गया August 7, 2019